कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान अर्थशास्त्र अध्याय 1 के लिए एनसीईआरटी समाधान In Hindi By Speed Yukti
Class :- 9th
Books - सामाजिक विज्ञान ( अर्थशास्त्र )
Chapter:- 1 पालनपुर गाँव की कहानी
Important Topics :- पालमपुर गाँव की कहानी के नोट्स in hindi
पालमपुर गांव की कहानी Class 9th Economics Chapter- 1
भारत कृषि प्रधान देश होने के कारण यहां अधिकांश जनता अर्थात किसान खेती पर निर्भर रहते है। देश में कृषि उत्पादन किसानों की मुख्य आजीविका है भारत में सभी लोग अमीर नहीं है इसलिए अधिक लोग कृषि पर निर्भर रहते हैं
किसान खेती दो प्रकार से कर सकते हैं पहला वह बारिश की पानी से दूसरे, ट्यूबवेल के पानी से। हर कोई किसान ट्यूबेल से खेती नहीं कर पाते है क्योंकि हरेक किसानों के पास इतना पैसा नहीं होता है कि वो ट्यूबवेल करके खेती करे।
आइए पालमपुर गांव की कहानी के पाठ में महत्वपूर्ण नोट्स जाने का प्रयास करते हैं यह नोट्स आपको हर एक सवाल को याद करना सरल में आता है इसलिए इसे ध्यान पूर्वक समझते रहिएगा चलिए शुरू करते।
पालमपुर गांव की कहानी पाठ के अनुसार पालमपुर में कुल 400 परिवार है जिनमें से 150 परिवार गरीब होने के कारण उसके पास भूमि नहीं है वह अपनी आजीविका चलाने के लिए मजदूरी करते हैं वहां 240 परिवार छोटे किसानों के है जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है।
पालमपूर मे मजदूरों की मजदूरी कम क्यों है
पालमपुर गांव में सरकार द्वारा खेतों पर मजदूर करने वाले लोगों की दिन की न्यूनतम मजदूरी ₹320 निर्धारित की है किंतु दुख की बात है कि पालमपुर में खेतिहर मजदूरों को इससे भी काफी कम मजदूरी मिलती है चौकी पालमपुर गांव में मजदूर एपीके रोजगार बिल्कुल कम है बेरोजगारी सही रहती है इसलिए श्रमिकों में अधिक स्पर्धा है इसलिए वे कम मजदूरी पर ही काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं
पालमपुर गांव में किसानों की भूमि का वितरण
पालमपुर में कुल 450 परिवार रहते हैं जिनके पास भूमि का वितरण समान रुप में नहीं है
(1) पालमपुर में 150 परिवार भूमिहीन कृषक है
(2) 240 परिवारों के पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है
(3) 60 परिवारों के पास 2 एकड़ से अधिक भूमि है
नोट:- पालमपुर में कुछ ऐसे परिवार हैं जिनके पास 10 हेक्टेयर या इससे अधिक भूमि है।
पालमपूर में लघु किसानों की स्थिति
पालमपुर में लघु किसानों को खेती करने में समस्या आती रहती है जैसे बीज और कीटनाशकों के अतिरिक्त अन्य कृषि सामानों को खरीदने के लिए नकद पैसों की जरूरत होती है। लघु किसान को नगद पैसों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े किसानों से कर्ज लेना पड़ता था। वह 24% की दर पर कर्ज लेते थे। उनको यह बात माननीी पड़ती थी कि बड़े किसानों के खेतों की फसल कटाई के समय उसके खेतों में मजदूरी के रूप में ₹100 प्रति दिन काम के लिए मंजूरी देनी पड़ती कि इस प्रकार पालमपुर के किसानों का शोषण हो रहा था।
पालमपुर में विभिन्न प्रकार के उत्पादन क्रियाओं अथवा गतिविधियों को दो भागों में बांटा जा सकता है
(1) कृषि उत्पादन क्रियाए
पालमपुर में 75% (परसेंट) लोगों की मुख्य उत्पादन क्रिया कृषि है इसमें विभिन्न फलों, सब्जियों, फलों, फूलों इत्यादि को उसमें शामिल किया गया है
(2) गैरी कृषि उत्पादन क्रियाए
पालमपुर में कृषि के अलावा और विभिन्न प्रकार के कार्य किए जाते हैं जिसे गैर कृषि क्रियाएं भी कहते हैं। जैसे:- गैर-कृषि उत्पादन गतिविधियों में लघु विनिर्माण, परिवहन, पशुपालन, दुकानदारी, मछली पालन, परंपरागत उद्योग आदि गतिविधियां शामिल है।
फसलो के प्रकार
(1) रबी की फसल - गेहूं, चना, मसूर, मटर
यह फसल सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर के महीनों में बोली जाने वाली प्रमुख फसल है इन फसलों को गर्म वातावरण की जरूरत होती है
(2) खरीफ की फसल - बाजरा, ज्वार, मक्का
यह फसल सामान्य: जून-जुलाई के महीने में बोई जाने वाली प्रमुख फसल है इन फसलों को बोने के लिए उसी वक्त गर्म वातावरण की जरूरत होती है। तथा पकते वक्त शुष्क वातावरण की आवश्यकता होता है।
हरित क्रांति = इस क्रांति का मुख्य दुष्प्रभाव यह रहा कि हरित क्रांति में अधिक से अधिक रासायनिक उर्वरकों को एवं कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता कम हो जाती है
हरित क्रांति में ज्यादा उपज देने वाले बीजों का उपयोग किया जाता है जैसे:- HYV बीज
कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करने हेतु हरित क्रांति के कारण आधुनिक विधियों को अपनाया गया।
खेती की आधुनिक विधियां
(1) जुताई हेतु ट्रैक्टर
(2) कटाई हेतु हार्वेस्टर
(3) थ्रैशर
(4) कीटनाशक
(5) रासायनिक उर्वरक
(6) सिंचाई हेतु मोटरपंप
(7) बिजली कनेक्शन इत्यादि खेती की आधुनिक विधियां।
पालमपूर में बिजली प्रचारकों का योगदान
(1) पालमपुर गांव में अधिकतर घरों में बिजली कनेक्शन है
(2) पालमपुर में खेती में सिंचाई हेतु बिजली का महत्वपूर्ण योगदान रहा है जैसे नलकूप द्वारा सिंचाई
(3) खेतों में मोटर पंप के माध्यम से फव्वारे द्वारा सिंचाई आसानी से हो जाती है। जिसे फसल को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल जाता है यह मुख्य योगदान है
(4) बिजली से चलने वाले नलकूप ज्यादा प्रभावी ढंग से अधिक क्षेत्र में सिंचाई होने लगी
(5) बिजली के प्रचार से किसान परंपरागत सिंचाई के साधनों का प्रयोग किया करते थे। जैसे रहट से पानी निकालना।
भारत में पिछले कुछ वर्षों में गाँवों की अर्थव्यवस्था में काफि परिवर्तन हुए है। पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रो में चिकित्सा, व्यापार एवं शिक्षा सुविधाओं में काफी विस्तार हुआ है। भारत में ग्रामीण क्षेत्रो के घरों में बिजली का व किसानों के लिए विभिन्न आधुनिक विधियों का विस्तार हुआ है।
भौतिक पूंजी
लोग दैनिक जीवन में आजीविका चलाने के लिए कोई न कोई धंधा करते रहते है । भौगोलिक पूंजी वह है जिसमें प्रकृति से प्राप्त वस्तुए जिनसे आय प्राप्त कर सके, वह भौतिक पूंजी है।
भौतिक पूंजी में विभिन्न प्रकार के कार्य शामिल है जैसे :- कच्चा माल, खाद्यान्न उत्पादन, परिवहन, बैंकिंग, व्यापार शामिल है
भौतिक पूंजी दो प्रकार की होती है
(1) स्थाई पूंजी - भवन, औजार, मशीन
स्थाई पूंजी का प्रयोग सामान्यतः कई वर्षों तक प्रयोग किया जाता है, जिसे स्थाई पूंजी कहते है।
(2) कार्यशील पूंजी - कच्चा माल, नकद पैसा
हमारा व्यवसाय चलाने के लिए दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कच्चे माल तथा नकद पैसो की जरूरत होती है, जिसे कार्यशील पूंजी कहते है।
हमारे आस-पास के क्षेत्र में विभिन्न कार्य हो रहे जिसे गैर कृषि क्रियाएँ भी कहते है
(1) डेयरी कार्य (2) छोटे दुकानदार (3) हस्तशिल्प कार्य (4) परिवहन सेवाएं जैसे :- रिक्शा, बस, बैलगाड़ी, ट्रक, जीप (5) छोटे व्यवसाय जैसे :- मिट्टी के बर्तन बनाना, गुड बनाना, तेल मिल आदि।
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