(1) सामाजिक हालात - रूस एक कृषि प्रधान देश होने के कारण रूस की 85% जनता कृषि कार्यो मे लगी हुई थी। उस समय लेनिन का मानना था कि किसानो में एकजुटता नहीं होने के कारण वे आपस में बंटे हुये थे तथा वे धार्मिक स्वभाव के थे। वे सामंतो व नवाबो का बिल्कुल भी समान नही करते थे।उस समय समाज देहाती क्षेत्रो में किसानो, सामंतो तथा चर्च के बीच बंटा हुआ था तथा विशाल संपत्तियो पर सामंतो, राजशाही और आर्थोडोक्स चर्च का कब्जा था। इन्हें सामंतो के अनेक अत्याचारों का सामना करना पडता था। कूलीन और मध्यम वर्ग के लोग किसानो तथा मजदूरो को हीन दृष्टि से देखते थे तथा वे अत्याचारी व्यवहार करते रहते थे। वहाँ का शहरी समाज मजदूरों एवं उद्योगो मे बंटा हुआ था तथा सामाजिक स्तर पर मजदूर बंटे हुये थे मजदूरो को तरह किसान भी बंटे हुये थे । महिलाएं एवं पुरुष मजदूरी करते थे जबकि महिलाओं को पुरूषों की अपेक्षा कम वेतन मिलता था।
(2) आर्थिक हालात - रूस मे 85% जनता 1905 से पुर्व अपनी आजीविका चलाने के लिए खेती पर निर्भर थी अर्थात् उनकी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए खेती उनकी प्रमुख क्रिया थी। उनकी आर्थिक दशा बहुत दयनीय थी। रूसी साम्राज्य में कारखाने उद्योगपतियो की निजी सम्पत्ति थे। वहाँ पर लोग कारीगर तथा मजदूर थे, उन्हें कारखानो मे 10 से 12 घंटो तक काम करना पडता था और वेतन भी कम मिलता था। जार निकोलस ll की सरकार ने उनकी आर्थिक दशा सुधारने के लिए कोई प्रयत्न नही किया था।
(3) राजनैतिक हालात - 1905 से पुर्व रूस मे जार निकोलस ll का शासन था तथा यह निरंकुश राजशाही थी। वहाँ जार की निरंकुशता के कारण सर्वत्र असंतोष व्याप्त था, इस प्रकार वहाँ अजवाबदेह तथा स्वेच्छाचारी शासन था। उस समय रूस मे गैर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था थी जो जनता को अपने नियंत्रण में लिए हुए काम करती थी। राजनीतिक दलो के गठन को मान्यता नही थी। वहाँ पर प्रशासन अयोग्य और भ्रष्टाचारी अधिकारियों के नियंत्रण में होने के कारण मजदूरों, भूमिहीनों तथा महिलाओं को शासन में भाग लेने का कोई अधिकार नही था।
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