फ्रांस में क्रांति की शुरुआत निम्न परिस्थितियों में हुई:-
(1) समाज/ सामाजिक असमानता - उस समय फ्रांस में 1789 की क्रांति से पहले सामाजिक असमानता होने के कारण वहाँ का समाज 18वीं शताब्दी में तीन वर्गो मे बंटा हुआ था ।
फ्रांस का समाज के वर्ग को एस्टेट भी कहते है।
तीन एस्टेट
(१) प्रथम एस्टेट - पादरी वर्ग
(२) द्वितीय एस्टेट - कूलीन वर्ग
(३) तृतीय एस्टेट - सामान्य लोग
ऊपरी दो वर्गो को राज्य द्वारा विशेषाधिकार प्राप्त थे जबकि तृतीय एस्टेट के लोगों पर अन्यायपूर्ण कर लगाऐ जाते थे। तीसरे एस्टेट्स के लोगों को कोई भी राजनैतिक अधिकार प्राप्त नहीं थे।
(2) जीवन यापन का संघर्ष- फ्रांस की जनसंख्या में तेजी से बढोतरी हो गई इस कारण इससे खाद्यान्नों की मांग मे तेजी से वृद्धि हो गई । औस समय फ्रांस की जनसंख्या 1715 में लगभग 2.3 करोड़ से बढकर 1789 मे 2.8 करोड़ हो गई । इससे अनाज का उत्पादन मांग के अनुकूल न बढ सका और बेरोजगारी बढती गई।
(3) क्रूरतापूर्ण कर - वहाँ पर अनेक प्रकार के कर लगाए जाते थे जबकि तृतीय एस्टेट्स के लोगों के अलावा अन्य दोनों एस्टेट्स को विशेषाधिकार प्राप्त थे इस कारण उनको कर देने में छूट थी। तृतीय एस्टेट के लोगों को सभी कर चुकाने पडते थे।
(4) एस्टेट जेनरल की बैठक - फ्रांस के सम्राट लुई16वां ने नये करो के प्रस्ताव हेतु 5 मई 1789 को एस्टेट्स जेनरल की बैठक बुलाई । वहाँ के एस्टेट जेनरल के नियमो के अनुसार प्रत्येक वर्ग को एक एक मत देने का अधिकार था। लेकिन तृतीय एस्टेट के लोगों ने यह मांग रखी कि इस बार पूरी सभा द्वारा मतदान कराया जाए । इस वजह से तृतीय एस्टेट के लोगों की यह बात न मानने पर इस बैठकमें सम्राट लुई16वां ने प्रस्ताव को अस्वीकार दिया।
इन सभी कारणो से फ्रांस में क्रांति हुई ।
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