ये तीन एस्टेट निम्न प्रकार के होते थे -
(1) प्रथम एस्टेट ( पहला वर्ग ) - पादरी वर्ग के लोग
(2) द्वितीय एस्टेट ( दूसरा वर्ग ) - कूलीन वर्ग के लोग
(3) तृतीय एस्टेट (तीसरा वर्ग ) - सामान्य लोग जैसे किसान, कारीगर, भूमिहीन मजदूर, नौकर आदि।
प्रथम एस्टेट व द्वितीय एस्टेट मे चर्च, सरकारी अधिकारी तथा बडे बडे जमींदार शामिल थे। इन लोगों को राज्य के द्वारा विशेषाधिकार प्राप्त थे । उनके पास विशेषाधिकार प्राप्त होने के कारण ये लोग तानाशाही करते थे। ये लोग कर नहीं चुकाते थे। तीसरे एस्टेट के लोगों सभी कर चुकाने पडते थे। यह उनके साथ अन्याय था। यह कर टाइल व टाइद दो प्रकार का वसूल करना पडता था।
1789 की क्रांति से पहले अर्थात 18वीं शताब्दी में महिलाओं की दशा- (1) उस समय महिलाओं को घर का खर्चा चलाने के लिए मजदूरीकरनी पड़ती थी, लेकिन उनको मजदूरी पुरुषो की अपेक्षा कम मिलती थी।
(2) अधिकतर महिलाओं को शिक्षा प्राप्त नहीं थी, इसलिए उनको मजदूरी करनी पडती थी।
(3) उनको कम उम्र में ही माता-पिता द्वारा शादी के लिए मजबूर किया जाताथा।
(4) उनको अपनी नौकरी के साथ साथ परिवार की देखभाल करनी पडती थी।
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