वृत्तम् = आचरण, चरित्र
धर्मसर्वस्वम् = धर्म का सबकुछ
अक्षीणः = नष्ट न हुआ
प्रतिकूलानि = अनुकूल नहीं
तुष्यन्ति = संतुष्ट होते है
वारिवाहाः = जल वहन करने वाले बादल ( मेघः )
वक्तव्यम् = बोलना चाहिए, कहना चाहिए
विभुतयः = सम्पत्तियों
अगुणैः = गुणहीनो से
गुणयुक्तः = गुणों से युक्त
आरम्भगुर्वी = आरम्भ में लम्बी
क्षयिणी = घटती स्वभाव वाली
वृद्धिमती = लम्बी होती हुई
भिन्ना = ( छाया ) की तरह अलग-अलग
पूर्वार्द्धपरार्द्ध = पूर्वाह्न और अपराह्न
खलसज्जनानाम् = दुष्टों और सज्जनों की
मण्डनाय = करने के लिए
मरालैः = हंसो से
महीमण्डल = पृथ्वी को सुशोभित
विप्रयोगः अलग होना
गुणज्ञेषु = गुणों को जानने वालों में
आस्वाद्यतोयाः = स्वादिष्ट जल वाली
अपेयाः = न पीने योग्य
आसाध्य = पाकर
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