कक्षा 9वीं संस्कृत पाठ - 5 सूक्तिमौक्तिकम् के शब्दार्थ

वित्तम् = ऐश्वर्य, धन

वृत्तम् = आचरण, चरित्र 

धर्मसर्वस्वम् = धर्म का सबकुछ 

अक्षीणः = नष्ट न हुआ 

प्रतिकूलानि = अनुकूल नहीं 

तुष्यन्ति = संतुष्ट होते है

वारिवाहाः = जल वहन करने वाले बादल ( मेघः )

वक्तव्यम् = बोलना चाहिए, कहना चाहिए 

विभुतयः = सम्पत्तियों 

अगुणैः = गुणहीनो से

गुणयुक्तः = गुणों से युक्त 

आरम्भगुर्वी = आरम्भ में लम्बी 

क्षयिणी = घटती स्वभाव वाली 

वृद्धिमती = लम्बी होती हुई 

भिन्ना = ( छाया ) की तरह अलग-अलग 

पूर्वार्द्धपरार्द्ध = पूर्वाह्न और अपराह्न 

खलसज्जनानाम् = दुष्टों और सज्जनों की

मण्डनाय = करने के लिए 

मरालैः = हंसो से 

महीमण्डल = पृथ्वी को सुशोभित 

विप्रयोगः अलग होना

गुणज्ञेषु = गुणों को जानने वालों में 

आस्वाद्यतोयाः = स्वादिष्ट जल वाली 

अपेयाः = न पीने योग्य 

आसाध्य =  पाकर 

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